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डोईवाला के माजरी ग्रांट में सिंचाई नहर पर अवैध पुलिया निर्माण को लेकर हंगामा  अध्यक्ष दयाराम पालने पत्रकारों से की बतमीजी 

डोईवाला विधानसभा क्षेत्र के माजरी ग्रांट (खादर मोहल्ला, वार्ड नंबर 13) में सिंचाई नहर पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण को लेकर विवाद गहरा गया है। जल योजना कमेटी के स्पष्ट नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दबंगई से पुलिया निर्माण कराने की कोशिश का स्थानीय ग्रामीणों ने पुरजोर विरोध किया। विवाद बढ़ता देख जल योजना कमेटी के अध्यक्ष दयाराम पाल ग्रामीणों के तीखे सवालों का जवाब दिए बिना ही चुपचाप मौके से भागते नजर आए।नियमों की अनदेखी, 60-70 फीट फ्रंट के बाद भी रात-रात में लगाया गेट
पूर्व में खेड़ा मंदिर में आयोजित कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया था कि प्रति परिवार केवल ‘एक घर, एक पुलिया’ ही स्वीकृत होगी, जिसका लिखित अप्रूवल भी मौजूद है। इसके बावजूद माजरी ग्रांट में नियमों को ताक पर रखकर दूसरी पुलिया बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
आरोप है कि निर्माण करा रहे खेमपाल (पुत्र साधुराम पाल) के पास पहले से ही 60 से 70 फीट का मुख्य फ्रंट उपलब्ध है। इसके अलावा, घर के बैक साइड में पहले ही एक पुलिया बनाई जा चुकी है। अब पुनः अतिक्रमण करने की नीयत से दोबारा पुलिया का निर्माण कराने की कोशिश की जा रही है। हद तो तब हो गई जब प्रशासन को ठेंगा दिखाते हुए घर के पिछले हिस्से में रातों-रात नया गेट भी ठोंक दिया गया।
जल योजना कमेटी के अध्यक्ष दयाराम पाल जब निरीक्षण करने पहुंचे, तो ग्रामीणों ने अतिरिक्त पुलिया और अतिक्रमण से रास्ते में जाम लगने व नहर का प्रवाह बाधित होने की समस्या उठाई। इस पर खेमपाल व उनके समर्थकों पर ग्रामीणों के साथ बहसबाजी, धक्का-मुक्की और जबरन निर्माण का दबाव बनाने का आरोप है। विरोध करने पर ग्रामीणों को यह कहकर चुप कराने की कोशिश की गई कि “यह जल योजना कमेटी की मीटिंग है, निर्णय लेने का हक सिर्फ हमारा है, तुम्हारा कोई मतलब नहीं।”
क्या वोटों तक ही सीमित है हमारी अहमियत?’
कमेटी के इस रवैये से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि क्या ग्राम पंचायत में नागरिकों की कोई भूमिका नहीं है? चुनाव के समय तो हर ग्रामीण का वोट कीमती होता है, लेकिन सार्वजनिक संपत्ति पर अतिक्रमण रोकने की बात आती है तो कमेटी मनमानी पर उतर आती है।
ग्रामीणों के तीखे सवालों और लिखित फैसले के उल्लंघन पर जब अध्यक्ष दयाराम पाल कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए, तो वे मौके से चले गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि वे सिंचाई नहर पर किसी भी कीमत पर अवैध कब्जा या दूसरी पुलिया का निर्माण नहीं होने देंगे और इस पूरे मामले की लिखित शिकायत उच्च अधिकारी को भी कर चुके हैं

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