उत्तराखंड

उत्तराखंड की 20 इन जगहों पर बनेंगे नए बिजलीघर, नियोजन विभाग की मंजूरी.. जानिए क्या होंगे फायदे

देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्रदेश में 20 नए बिजलीघर (सब स्टेशन) बनाने की मंजूरी दे दी गई है। पावर ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन ऑफ उत्तराखंड लिमिटेड (पिटकुल) द्वारा इस प्रस्ताव को तैयार किया गया था, जिसे अब नियोजन विभाग की तकनीकी स्वीकृति समिति ने अंतिम स्वीकृति प्रदान कर दी है।

ऊर्जा एवं नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने इसकी औपचारिक पुष्टि करते हुए बताया कि एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) द्वारा सहायता प्राप्त परियोजना के दूसरे चरण में नए सब स्टेशनों का निर्माण और पुराने सब स्टेशनों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। उद्योग विभाग ने राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए सेलाकुई, लालतप्पड़ (देहरादून), हरिद्वार इंडस्ट्रियल एरिया और ऊधमसिंहनगर के औद्योगिक फार्म क्षेत्रों में पावर इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किए जाने की मांग की थी। इस मांग को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने ठोस कार्रवाई शुरू कर दी है।
नए सब-स्टेशनों की स्थापना

उत्तराखंड सरकार द्वारा किए जा रहे ऊर्जा ढांचे के सुदृढ़ीकरण के तहत विभिन्न क्षेत्रों में बड़े स्तर पर नए सब स्टेशनों के निर्माण और पुराने स्टेशनों के उन्नयन की योजना तैयार की गई है। इस परियोजना के अंतर्गत सिडकुल हरिद्वार में 400 केवी एआईएस सब स्टेशन, कोटद्वार में 400 केवी सब स्टेशन, ज्वालापुर में 220 केवी एआईएस सब स्टेशन और बरहनी बाजपुर में 220 केवी जीआईएस सब स्टेशन की स्थापना और क्षमता वृद्धि शामिल है। इन प्रमुख सब स्टेशनों के अलावा राज्य के अन्य कई औद्योगिक एवं strategy क्षेत्रों में भी नए सब स्टेशनों का निर्माण किया जाएगा, जिससे न केवल विद्युत आपूर्ति प्रणाली मजबूत होगी बल्कि औद्योगिक विकास और निवेश को भी नई गति मिलेगी।
योजना के मुख्य उद्देश्य

प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि यह योजना केवल उद्योगों को ही नहीं बल्कि पर्यटन क्षेत्र को भी सुदृढ़ करेगी। उत्तराखंड में तेजी से बढ़ रहे पर्यटन ढांचे को बेहतर पावर सप्लाई की आवश्यकता है, जिसे ध्यान में रखते हुए नए सब स्टेशनों का निर्माण और पुराने स्टेशनों की क्षमता वृद्धि की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य की बिजली आपूर्ति को भरोसेमंद और निरंतर बनाना है, ताकि लोगों को निर्बाध विद्युत सुविधा प्राप्त हो सके। इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। इससे आर्थिक विकास के साथ राज्य की समृद्धि भी सुनिश्चित होगी।

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