प्रो. एमपीएस बिष्ट के अनुसार, नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर हैदराबाद से पांच अगस्त के सेटेलाइट चित्र प्राप्त किए गए। हालांकि, ग्लेशियर क्षेत्र में पूरे क्षेत्र में बादल होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। हालांकि, वर्ष 2022-23 के सेटेलाइट चित्र में ग्लेशियर की बैकवॉल में बड़ी बड़ी दरारें नजर आ रही हैं। इसके अलावा निचले क्षेत्र में 50 से 60 मीटर ऊंचे मलबे के ढेर दिख रहे हैं।