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उत्तराखंड: फर्जी संपत्ति बताकर बैंक को 77 करोड़ का चूना! पुलिस ने नहीं सुनी.. कोर्ट ने दर्ज किया मुकदमा

उधमसिंह नगर: उत्तराखंड के Pantnagar में एक बड़ा वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है। यहां बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अपूर्व पाण्डेय द्वारा दायर प्रार्थना पत्र के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट Rudrapur के आदेश पर थाना पंतनगर में चार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।

बैंक के वरिष्ठ शाखा प्रबंधक अपूर्व पाण्डेय द्वारा दायर प्रार्थना पत्र के अनुसार, एक कंपनी के निदेशक विशाल सिंह, उनकी पत्नी स्वीटी सिंह और गीता शाह ने वर्ष 2016 में बैंक से विभिन्न खातों के माध्यम से करीब 77 करोड़ 8 लाख रुपये का ऋण लिया था। यह ऋण प्लांट, मशीनरी और कार्यशील पूंजी की जरूरतों के लिए स्वीकृत किया गया था। हालांकि, बैंक के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपियों ने समय पर ऋण की किस्तों का भुगतान नहीं किया, जिसके चलते 23 जनवरी 2019 को सभी खाते एनपीए घोषित कर दिए गए। इसके बाद बैंक ने SARFAESI Act, 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष वाद दायर किया। 7 नवंबर 2023 को जिला मजिस्ट्रेट ने बैंक के पक्ष में निर्णय देते हुए बंधक संपत्ति पर कब्जा करने की अनुमति दे दी। इसके अतिरिक्त, बैंक ने National Company Law Tribunal, इलाहाबाद में भी मामला दायर किया, जहां 3 जून 2024 को बैंक के पक्ष में फैसला आया।आदेश के अनुपालन में जब बैंक और इंटरिम रेजोल्यूशन प्रोफेशनल (IRP) की टीम 11 जून 2024 को पंतनगर स्थित फैक्ट्री परिसर पहुंची, तो वहां से प्लांट, मशीनरी और अन्य बंधक सामान गायब मिला। प्रार्थी के अनुसार, आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत बैंक की बंधक संपत्ति को अवैध रूप से हटाकर गबन किया है, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान हुआ है।
इस संबंध में 16 अगस्त 2024 को थाना पंतनगर में शिकायत दी गई, लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद डाक के माध्यम से और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी शिकायत भेजी गई, फिर भी मामला दर्ज नहीं हुआ। अंत में न्यायालय की शरण लेने पर कोर्ट ने पुलिस को मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
थाना पंतनगर के प्रभारी निरीक्षक नंदन सिंह बिष्ट ने पुष्टि करते हुए बताया कि न्यायालय के निर्देश पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विवेचना जारी है। पुलिस अब पूरे प्रकरण की गहन जांच कर रही है और आरोपियों की भूमिका, संपत्ति के गायब होने तथा वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है। यह मामला जिले में बैंकिंग धोखाधड़ी के बड़े मामलों में से एक माना जा रहा है।

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